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देखते देखते हम बड़े हो गए!!

देखते देखते हम बड़े हो गए

न जाने कब अपने पैरो पर खड़े हो गए

न जाने कब जिम्मेदारियों ने अपने नीचे दबाया

मुश्क़िलों से खुद लड़ना हमें सिखाया!!


डर से भागना नही, डर से लड़ना बताया,

दर्द में भी खुद से संभलना समझाया

इतने बड़े हो गए की छुट गए घर के द्वार

अब याद आता है माँ पापा का प्यार


टीचर्स के ताने, तो स्कूल न जाने के बहाने

दोस्तों का साथ, और उन्ही के साथ मस्ती मजाक

धीरे धीरे सब छुट गया,

अब एक एक करके सबसे नाता टूट गया!!


कभी सोचता हूं कि क्या खोया क्या पाया हमने,

जीवन के इस दौर में ,न जाने क्या कमाया हमने।

पर अब हम बड़े हो गए,

जिम्मेदारियों के बोझ से अपने पैरों पर खड़े हो गए

जिम्मेदारियों के बोझ से अपने पैरों पर खड़े हो गए!!


:-अविनाश!!

 
 
 

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Avinash Kumar Jha

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