!!चलना तो पड़ेगा!!
इस भीड़ से अब हमको क्या लेना,
न अब पहले वाली बात है
न अब वही पुरानी हँसी में बीतती रात है
इस सफर में बस अंजान हुँ
कहने को तो बस मैं भी एक इंसान हुँ
कितना दर्द झेला है मैं खुद जानता हूँ
मु्श्क़िलों से कब कब खुद को धकेला है
मै खुद मानता हूं
अकेला हो गया हुँ अब इस सफर में
कट जाएगी बाकी की ज़िंदगी भी इस उमर में
इस सफर में धूप तो होगी पर चलना तो पडेगा
अब कदम बढ़ा लिया है तो आगे निकलना तो पड़ेगा
बिना छाव की तलाश किए खुद को ढलना तो पड़ेगा
अब दर्द झेलने को ठाना है तो सहना तो पड़ेगा
कब तक कोई आएगा तुम्हारा हाथ थामने
अपने अंदर के डर को हराकर आगे बढ़ना तो पड़ेगा
बहुत इम्तिहान ले रही है ये ज़िंदगी भी
अपनी मुश्किलो को खुद से दूर धकेलना तो पड़ेगा
कितनी भी रुकावटें क्यों न आए अब इस दौर में
सभी रुकावटों से खुद को संभलना तो पड़ेगा
कुछ भी हो जाए आखिर चलना तो पड़ेगा,
कुछ भी हो जाए आखिर चलना तो पड़ेगा।।
:- अविनाश❤
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