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समझ

की क्या कहु कुछ समझ नही आता है,

समय कैसे बीत जाए पता नही चल पाता है।

जिंदगी की रेस पीछे छुट जाती है

पुरानी यादों को साथ लेकर आती है

नए रिश्ते बनते बिगड़ते जाते है,

लोग भी अब बहुत जल्दी ही भूल जाते है।

नई एहसास पनपने लग जाती है

नई जज्बात झलकने लगती है

यादों से दूर भागना चाहते है सभी

अब मिलते है पुराने दोस्त कभी कभी

Call पर भी बाते नही होती है अब किसी से

व्यस्त है सभी अपने जीवन की खुशी में

कभी मिलना होगा तो मिल जाएंगे

वही पुरानी बातों को फिर से दोहराएंगे

याद करेंगे वही बीती हुई बातें

नए जीवन की करेंगे शुरूआते

बड़े याद आओगे आगे जाकर तुमलोग

तब पता चलेगा की जिंदगी की इस रेस मे

क्या खो दिए है हमलोग

न फिर वही मिलना होगा, न फिर वही बातें होगी

रोते रोते रह जाओगे, न अब फिरसे वही मुलाकाते होगी

ए रब लौटा दे मुझे मेरा वो पल

ए रब लौटा दे मुझे मेरा वो पल

शायद रहु या न रहु मै कल

शायद रहु या न रहु मै कल।।


:- अविनाश!! ❤

 
 
 

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Avinash Kumar Jha

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